टारगेट किलिंग: 90 के दशक में जिस VDC से खौफ खाते थे आतंकी, अब VDG बनके संभालेगी मोर्चा

जम्मू के डांगरी में दो दिन के अंदर आतंकियों ने छह लोगों की हत्या कर दी. आतंकी घरों में घुसे, आधार कार्ड देखा और गोली मार दी. हाल के महीनों में हिंदुओं को टारगेट कर हत्या करने की घटनाएं बढ़ी हैं. आतंकी और भी घरों में घुसकर कई लाशें गिराते, लेकिन तब तक बाल कृष्ण नाम के शख्स ने तड़ा-तड़ दो फायरिंग कर दी. आतंकियों को लगा कि सुरक्षाबलों की ओर से फायरिंग की जा रही है और वे भाग खड़े हुए.

बालकृष्ण के पास बंदूक का लाइसेंस नहीं था पर घर में राइफल पड़ी थी. जरूरत पड़ी और उन्होंने कर दी फायरिंग. डांगरी के सरपंच धीरज शर्मा के अनुसार, कभी यहां भी वीडीसी (VDC) यानी ग्राम रक्षा समिति एक्टिव हुआ करती थी. लेकिन पुलिस ने 60 साल से ज्यादा उम्र वालों से हथियार वापस ले लिया था, जिन्हें फिर से अलॉट नहीं किया गया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पास बंदूकें हों तो वे आतंंकियों को मुंहतोड़ जवाब देंगे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस डीजी दिलबाग सिंह ने कहा है कि ग्राम रक्षा समिति से अब बंदूकें वापस नहीं ली जाएंगी. जिस वीडीसी की बात हमने ऊपर की है, उसका गठन नब्बे के दशक में किया गया था. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.

1995 में बनाई गई थीं ग्राम सुरक्षा समितियां

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई के लिए वर्ष 1995 में वीडीसी यानी ग्राम सुरक्षा समितियों का गठन किया गया था. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू के 10 जिलों में 26,567 स्थानीय लोगों की भर्ती करते हुए उन्हें हथियार दिया गया था, ताकि वो आतंकियों से मुकाबला कर सकें और अपना बचाव कर सकें. सबसे अधिक वीडीसी स्वयंसेवकों की संख्या 5818 राजौरी जिले में रही है. इसके बाद रियासी में 5730 और डोडा में 4822 है.

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जम्मू-कश्मीर बीजेपी के महासचिव सुनील शर्मा के अनुसार, डोडा में जब आतंकियों ने हिंदुओं के खिलाफ खूनी खेल खेला था, तब पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने डोडा बचाओ आंदोलन को सपोर्ट किया था.

पुलिस बिल-2013 के तहत सरकार ने वीडीसी को कानूनी कवर प्रदान करने का प्रस्ताव भी बनाया था. लेकिन बाद के वर्षों में तत्कालीन सरकारों ने ज्यादातर समिति सदस्यों पर मिसयूज का आरोप लगाते हुए हथियार वापस ले लिए गए और समितियों को भंग कर दिया गया.

आतंक के खात्मे में रहा अहम रोल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ग्राम सुरक्षा समितियों ने जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में आतंकवाद के खात्मे में अहम भूमिका निभाई थी. 90 के दशक में डोडा में आतंकियों ने खूब आतंक मचाया. हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा जाने लगा था. एक शादी में 27 लोगों को कतार में खड़ा कर गोलियों से भून दिया गया. इस घटना के तुरंत बाद 35 हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी.

ऐसी और भी कई घटनाओं के बाद वीडीसी ने मोर्चा संभाला था और आतंकियों से लड़ाई लड़ी थी. बाद में समिति सदस्यों से हथियार वापस लिए जाने लगे. हालांकि पुलिस का कहना था कि केवल साठ साल की उम्र पार कर चुके सदस्यों से हथियार जमा करने को कहा गया, ताकि उनकी जगह युवाओं को मौका दिया जाए.

वीडीसी का वीडीजी के रूप में पुनर्गठन

पिछले साल एक प्रस्ताव तैयार किया गया, वीडीसी को वीडीजी के रूप में पुनर्गठित करने का. मार्च 2022 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को ग्राम रक्षा समूह (वीडीजी) बनाने की मंजूरी दे दी, जिन्हें पहले ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) के रूप में जाना जाता था. ‘जम्मू-कश्मीर में ग्राम रक्षा समूहों (वीडीजी) की संशोधित योजना’ शीर्षक से गृह मंत्रालय ने पत्र जारी किया और कहा,

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बता दें कि जम्मू-कश्मीर भाजपा ने गृह मंत्री अमित शाह से ग्राम रक्षा समिति के पुनर्गठन की मांग की थी. गृह मंत्रालय के फैसले की प्रशंसा करते हुए बीजेपी महासचिव सुनील शर्मा ने कहा कि वीडीसी का वीडीजी के रूप में पुनर्गठन करने से जम्मू कश्मीर के सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी.

 

 

 

 

 

 

 

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