UP में मदरसों की जांच का मामला गरमाया, मदरसा बोर्ड के चेयरमैन ने अफसरों पर बोला हमला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच को लेकर मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बीते दिनों मदरसों की जांच कराए जाने को लेकर यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन ने अल्पसंख्यक मंत्री को पत्र लिखकर जांच टालने की मांग की थी जिस पर मंत्री ने जांच को फिलहाल आगे बढ़ाते हुए थोड़े दिन बाद कराए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद मदरसों की जांच का मामला फिर से उठने लगा है।

इसको लेकर यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद ने विभाग से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों पर निशाना साध दिया है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक मंत्री को फिर से पत्र लिखकर जांच पर फिलहाल रोक लगाने की मांग की है उन्होंने कहा कि अगर जांच बहुत जरूरत हो तो अगस्त के बाद कराइ जाए। डॉ. जावेद ने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि वैसे भी 2017 से तीन बार हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार ने बिना मदरसा बोर्ड की बैठक में पास कराए डायरेक्टर को जांच कराने के लिए पत्र लिख दिया है। उधर डायरेक्टर ने उस पत्र के आधार पर जिलों में जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह जांच साल 2017 से तीन बार हो चुकी है। वहीं मानक, मान्यता को अप्रूव करके इससे जुड़ी सभी फ़ाइले पहले से ही निदेशालय और रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद है। चेयरमैन ने कहा जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार जांच होने से अब जांच उबाऊ लगने लगी है, जांच का नतीजा कुछ नहीं आया। ऐसे ही जो सर्वे हुआ उसका भी नतीजा अभी तक कुछ नहीं आया।

डॉ. इफ्तिखार अहमद ने बताया कि मदरसा की जांच से इन लोगों को फायदा नजर आता है। उन्होंने बताया कि 13 फरवरी से मदरसा में परीक्षा होनी है, ऐसे में अगर जांच कराई जाएगी तो परीक्षा कहीं ना कहीं प्रभावित होगी। मरदसो से फॉर्म कम आ रहे, पिछले इम्तिहान के स्क्रूटनी के रिजल्ट अभी तक जारी नहीं हो सके, कई बच्चे अपसेन्ट है जबकि इसमें से कई बच्चे परीक्षा केंद्र पर उपस्थित थे इसकी धांधली की भी अभी रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इसलिए मदरसों की जांच का एक निर्धारित समय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच से सवा से डेढ़ लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगाना यह उचित नहीं है।

इसके साथ ही डॉ. इफ्तिखार ने बताया कि अल्पसंख्यक मंत्री ने बताया था कि इस जांच को कैंसिल कर दिया गया है। इस बात को अल्पसंख्यक मंत्री ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों के सामने कहा था लेकिन फिर भी अधिकारी नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री के कहने के बाद भी जांच रद्द करने का कोई लिखित आदेश नहीं जारी किया गया। इसीलिए अल्पसंख्यक मंत्री को जांच रद्द करने के लिए फिर से पत्र लिखा है। कहा कि अगर जांच होगी तो बच्चों के इम्तिहान नहीं हो पाएंगे। जिसके कारण यह है इम्तिहान अगस्त में चले जाएंगे।

बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि मदरसा बोर्ड एक ऑटोनॉमस बॉडी होने के बावजूद भी इसके वजूद के साथ अच्छा नहीं हो रहा है डॉ इफ्तिखार ने कहा कि रजिस्टर जांच के आदेश दे दे रही है आदमी कटघरे में खड़ा हो जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम जनप्रतिनिधि है, समाज मे हमे जवाब देना पड़ रहा है। पीएम मोदी चाहते हैं कि एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर हो, सबका साथ सबका विकास हो और यह लोग जांच करा रहे हैं। अगर पसमांदा समाज के बच्चे इम्तिहान नहीं दे पाए, या किसी कारण इम्तिहान खराब हो गए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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