नई दिल्ली : भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि अफगानिस्तान पर टीम की 7 विकेट से जीत सिर्फ नतीजे से कहीं ज्यादा अहम थी। कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान टीम की उस सोच से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए जिसमें वे व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय सामूहिक सफलता को प्राथमिकता देते हैं। लक्ष्य का पीछा करने के आखिरी पलों का जिक्र करते हुए गावस्कर ने केएल राहुल के आक्रामक रवैये पर बात की, जबकि शुभमन गिल शतक के बहुत करीब थे।
गावस्कर ने जियो स्टार से कहा, ‘जिया-उर-रहमान के उस ओवर से पहले उन्होंने तीन ओवर में सिर्फ 19 रन दिए थे। फिर केएल राहुल ने उस ओवर में 20 रन बनाए। उस समय तक शुभमन गिल को शतक तक पहुंचने के लिए 21 रनों की जरूरत थी और टीम को जीतने के लिए लगभग 30 रनों की। लेकिन फिर राहुल ने मोर्चा संभाला।’
गावस्कर के लिए वह पल भारतीय ड्रेसिंग रूम के माहौल को बखूबी दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा, ‘यह आपको इस टीम के बारे में सब कुछ बताता है। यह व्यक्तिगत उपलब्धियों के बारे में नहीं है। यह इस बारे में है कि हर खिलाड़ी टीम के लिए क्या कर सकता है। 23वें ओवर में मैच जीतना दिखाता है कि लक्ष्य का पीछा कितनी सटीकता से किया गया। यह एक मुश्किल लक्ष्य था, बिल्कुल भी आसान नहीं। लेकिन उन्होंने इसे बहुत आसान बना दिया क्योंकि उन्होंने टीम को प्राथमिकता दी।’
गावस्कर ने नीतीश कुमार रेड्डी की भी खास तौर पर तारीफ की जिन्होंने रहमानुल्लाह गुरबाज का विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया। पूर्व भारतीय कप्तान उस यॉर्कर के सटीक इस्तेमाल से बहुत प्रभावित हुए जिसने गुरबाज की शानदार शतकीय पारी का अंत किया। उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार रेड्डी ने एक बेहतरीन यॉर्कर से रहमानुल्लाह गुरबाज का अहम विकेट लिया। अगर आप इस तरह सटीक यॉर्कर डाल सकते हैं, तो आप टीम के लिए बहुत कीमती खिलाड़ी बन जाते हैं।’
गावस्कर ने गौर किया कि नीतीश को तब सफलता मिली जब उन्होंने अलग-अलग तरह की गेंदें (वेरिएशन) आजमाने के बजाय अपनी यॉर्कर पर भरोसा किया। उन्होंने कहा, ‘हर बार जब उन्होंने कुछ अलग या फैंसी करने की कोशिश की, तो रन पड़े। लेकिन हर बार जब उन्होंने यॉर्कर का इस्तेमाल किया, तो उन्हें सफलता मिली।’ उनका मानना है कि इस ऑलराउंडर की गेंदबाजी से भविष्य में भारत को एक अतिरिक्त रणनीतिक विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘तो, मुख्य बात यह है। भारत के पास अब नीतीश कुमार रेड्डी के रूप में एक ऐसा खिलाड़ी है जो पांचवें या छठे गेंदबाज की भूमिका निभा सकता है। पिच और मैच की स्थिति के आधार पर वह कप्तान और चयनकर्ताओं को लचीलापन देते हैं। मुझे बल्लेबाज के तौर पर चुनें या गेंदबाज के तौर पर मैं तैयार हूं। किसी भी टीम के लिए यह बहुत बड़ी बात है।’
एक और खिलाड़ी जिसने गावस्कर का ध्यान खींचा, वह थे डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़, जिन्होंने अपने पहले वनडे मैच में अपनी गति और नियंत्रण से प्रभावित किया। उन्होंने कहा, ‘मैं गुरनूर बराड़ से बहुत प्रभावित हुआ। उन्होंने सटीक लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की। उनकी गति अच्छी थी और उन्होंने गेंद को थोड़ा मूव कराया, बहुत ज्यादा नहीं। डेब्यू पर आपको बहुत ज्यादा स्विंग की जरूरत नहीं होती। नियंत्रण ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक नए खिलाड़ी के तौर पर, उनका नियंत्रण बेहतरीन था।’
गावस्कर का मानना है कि बराड़ में उच्चतम स्तर पर सफल होने के गुण हैं और उन्होंने कहा कि उनके डेब्यू ने भारत की तेज गेंदबाजी की गहराई को दिखाया। पूर्व क्रिकेटर ने कहा, ‘उन्होंने जो किया है, वह अविश्वसनीय है। वह एक बहुत अच्छे खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। उनकी पहली गेंद लगभग 140-145 किमी/घंटा की गति से थी, जो दाएं हाथ के बल्लेबाज से दूर जा रही थी। कोई भी आपको बताएगा कि अगर आप उस गति से गेंदबाजी कर सकते हैं और गेंद को दूर ले जा सकते हैं, तो यह बहुत कीमती है। इसमें अच्छा नियंत्रण, अच्छी ऊंचाई और बल्ले के स्प्लाइस (हैंडल और ब्लेड के जोड़) पर गेंद मारने की क्षमता जोड़ लें – तो आप उस पहले विकेट के हकदार हैं। उन्होंने वे सभी गुण दिखाए। बहुत ही शानदार शुरुआत।’