मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में बगावत की अटकलों के बीच पार्टी ने अपने सांसदों को ‘महत्वपूर्ण मुद्दों’ पर चर्चा के लिए नयी दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होने का ‘व्हिप’ जारी किया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि पार्टी बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू कर सकती है।
पार्टी ने 2022 में भी इसी तरह का ‘व्हिप’ जारी किया था जब महाराष्ट्र के मौजूदा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की गई थी। सूत्रों ने मंगलवार को बताया था कि विपक्षी शिवसेना (उबाठा) संकट का सामना कर रही है और उसके 9 लोकसभा सदस्यों में से 6 से 7 सदस्य शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने के इच्छुक हैं और फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।
चर्चा में आए वे 6 सांसद कौन हैं?
शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच जिन 6 सांसदों के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे इस प्रकार हैं:
संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व): 2024 में बीजेपी के मिहिर कोटेचा को हराकर संसद पहुंचे। मुंबई के मराठी वोटबैंक पर इनकी मजबूत पकड़ है।
भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिर्डी): अहमदनगर जिले के ग्रामीण और सहकारी क्षेत्र के बड़े नेता हैं। 2024 में महायुति के उम्मीदवार को शिकस्त देकर जीते।
संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी): मराठवाड़ा क्षेत्र में उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी और लंबे समय से पार्टी के वफादार स्तंभ माने जाते हैं।
संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम): विदर्भ क्षेत्र के प्रमुख चेहरे हैं। पूर्व विधायक रहे हैं और 2024 में पहली बार इस सीट से सांसद चुने गए।
नागेश पाटील आष्टीकर (हिंगोली): पूर्व विधायक और संगठन के पुराने नेता हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से इनकी मुलाकातों को लेकर अफवाहें गर्म रहीं।
ओमराजे निंबालकर (धाराशिव): मराठवाड़ा में उद्धव सेना का आक्रामक चेहरा हैं। 2019 और 2024 में लगातार दूसरी बार भारी मतों से जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं।
हालांकि इन नेताओं में से कुछ ने सार्वजनिक तौर पर पाला बदलने की खबरों का खंडन किया है, लेकिन दिल्ली में इनकी बैठकों को लेकर सस्पेंस बरकरार है।
क्या कहता है कानूनी नंबर गेम?
देश के दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अगर किसी पार्टी के सांसदों को बिना सदस्यता गंवाए अलग गुट बनाना है या किसी दूसरी पार्टी में विलय करना है, तो कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ आना जरूरी है। शिवसेना (UBT) के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं। कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों का बागी होना अनिवार्य है। अगर इनमें से केवल 4 या 5 सांसद ही टूटते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता रद्द हो सकती है। यही वजह है कि संजय राउत दावा कर रहे हैं कि विरोधियों के पास जरूरी जादुई आंकड़ा नहीं है।
1. 15-15 करोड़ के ऑफर का गंभीर आरोप
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर आक्रामक रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि उनके सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये के ऑफर दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की अस्मिता के साथ खिलवाड़ बताया और जनता के बीच सहानुभूति बटोरने की रणनीति शुरू कर दी।
पर्दे के पीछे से कानूनी दांव-पेच संभालने वाले नेता अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र सौंपा है। पत्र में मांग की गई है कि संसद में केवल शिवसेना (UBT) को ही मूल राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए। यदि कोई अन्य गुट विशेष दर्जे का दावा करता है, तो बिना उद्धव गुट का पक्ष सुने कोई फैसला न लिया जाए।