Mithun Sankranti 2026 : मिथुन संक्रांति के दिन करें सूर्य देव के इन मंत्रों का जाप, मिलेगा आरोग्य, यश और समृद्धि का आशीर्वाद

Mithun Sankranti 2026 : एक साल में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। सनातन धर्म में हर एक संक्रांति का बहुत खास महत्व है। यह दिन  सूर्य देव की पूजा करने और उनकी कृपा पाने के लिए बहुत उत्तम माना जाता है। 15 जून 2026, सोमवार को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर वृषभ राशि से सूर्य देव का गोचर मिथुन राशि में होगा। सूर्य देव का जब किसी राशि में प्रेवश होता है तो उसे उस राशि की संक्रांति कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ सूर्य देव की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानी दूर होती और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने के साथ कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं मिथुन संक्रांति के दिन सूर्य देव के कौन से मंत्र का जाप करने से जीवन में आएगा नया प्रकाश और उत्साह।

सूर्य प्रार्थना मंत्र

सूर्य भगवान की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।

विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।।

सूर्याष्टकम

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।

दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते

सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।

श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।

प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बन्धुकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।

एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजः प्रदीपनम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

सूर्य कवच

श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।

शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।

ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत्।।

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।

नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर:।।

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।

जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित:।।

सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।

दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:।।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।

सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति।।

कामना पूर्ति के लिए करें भगवान सूर्य के इन मंत्रों का जाप

ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।

ॐ सूर्याय नम: ।

ॐ घृणि सूर्याय नम: ।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।

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