अमेरिका-ईरान समझौते पर चीन की मुहर, पाकिस्तान की मध्यस्थता की तारीफ की

बीजिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद चीन ने भी अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत किया है। बीजिंग ने क्षेत्रीय तनाव कम होने पर संतोष जताते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग की। चीन ने कहा कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा दुनिया की साझा प्राथमिकता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन अमेरिका और ईरान के बीच हुई प्रगति का स्वागत करता है और आशा करता है कि दोनों पक्ष तय कार्यक्रम के अनुसार समझौते को आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा कि बीजिंग पाकिस्तान द्वारा की गई मध्यस्थता की कोशिशों की भी सराहना करता है। चीन का मानना है कि सभी संबंधित पक्ष शांतिपूर्ण संवाद और बातचीत के माध्यम से मतभेदों को दूर करने की प्रतिबद्धता बनाए रखें। लिन जियान ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बहाल होना पूरी दुनिया के हित में है। उन्होंने कहा कि चीन क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
 

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। हालिया तनाव और हमलों के कारण इस मार्ग पर नौवहन प्रभावित हुआ था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। 

चीन के इस बयान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमेरिका-ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता की उम्मीद जताई थी। भारत, चीन और दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं।

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