नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अमेरिका और ईरान के बीच वेस्ट एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है और इससे न केवल आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ, बल्कि कई देशों में जान-माल का नुकसान भी हुआ। मोदी ने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी इस समझ का स्वागत करता है और आशा करता है कि इसके क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी। उन्होंने कहा कि यह समझ समुद्री मार्गों पर आवाजाही और वैश्विक व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित हो सकती है।
I welcome the understanding reached between the United States and Iran on ending the conflict in West Asia, which has caused serious economic disruption across the world and led to loss of life in many countries.
India hopes that the implementation of this understanding will…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 15, 2026
भारत की नजर अंतिम समझौते पर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि शेष मुद्दों पर जारी बातचीत भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी और अंततः एक स्थायी तथा टिकाऊ समझौते का रास्ता निकलेगा। भारत लंबे समय से वेस्ट एशिया में शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे संघर्ष को समाप्त करने के लिए समझौता अंतिम रूप ले चुका है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को Switzerland में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम ये डील?
वेस्ट एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत अपनी तेल और गैस आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। इसके अलावा Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव कम होना भारत के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। बता दें कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह और आगे की वार्ताओं पर टिकी हैं। यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो यह वेस्ट एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।