‘American Dream’ के लिए आज भी Dunki रूट पर जाते हैं भारतीय, क्या है इस खतरनाक रास्ते का सच

 

क्या है Dunki Route: इस साल शाहरुख खान की तीसरी फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार है। राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित फिल्म डंकी (Dunki) की खूब चर्चा हो रही है। फिल्म Dunki गुरुवार 21 दिसंबर को स्क्रीन पर रिलीज होगी। डंकी में शाहरुख खान के अलावा, तापसी पन्नू, विक्की कौशल, बोमन ईरानी, ​​सुनील ग्रोवर, विक्रम कोचर और दीया मिर्जा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। शाहरुख खान अभिनीत ये फिल्म “डंकी रूट” (गधा रास्ता) पर आधारित है, जो अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में एंट्री करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लोकप्रिय लेकिन अवैध तरीका है। राज कुमार हिरानी की फिल्म बेहतर जिंदगी और अवसरों की तलाश में ‘फर्स्ट वर्ल्ड’ देशों में बसने के लिए कठिन रास्ता अपनाते हुए दिखाती है। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये रास्ता कौन सा है और क्यों इसे ‘डंकी रूट’ कहा जाता है।

आज भी कई भारतीय इस ‘डंकी रूट’ को अपनाते हैं। पंजाब, हरियाणा और गुजरात में युवाओं द्वारा अपनाए जाने वाले ‘डंकी रूट’ में बहुत सारे जोखिम शामिल होते हैं। उन्हें कई दिन बिना भोजन के, जंगलों, नदियों और समुद्र के रास्ते अधिकारियों से बचते हुए गुजारना पड़ता है। खतरों और अक्सर बुरे के बावजूद, यह अवैध मार्ग उन युवाओं के बीच लोकप्रिय है, जो बेहतर जिंदगी और ‘अमेरिकन ड्रीम’ का पीछा करना चाहते हैं। हाल ही में दुबई में एक कार्यक्रम में शाहरुख खान ने अपनी फिल्म के टाइटल का अर्थ समझाते हुए कहा, “डंकी एक अवैध यात्रा है जो बहुत से लोग अपने देश से बाहर दुनिया भर की सीमाओं के पार जाने के लिए करते हैं। इसे डंकी रूट (गधा यात्रा) कहा जाता है।”

क्या है Dunki का मतलब

Dunki शब्द donkey (गधे) का एक क्षेत्रीय उच्चारण है। Dunki एक पंजाबी मुहावरे से बना है जिसका अर्थ है “एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।” आसान शब्दों में कहें तो जब लोगों को अलग अलग देशों में रुकते-रुकाते हुए अवैध तरीके से बाहरी मुल्कों में भेजा जाता है तो उसे डंकी रूट कहते हैं। यह एक पंजाबी टर्म है जिसका अर्थ यह है कि कूद कर, फांद कर, फुदक कर एक जगह से दूसरी जगह जाना। यह अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोप जैसे देशों तक पहुंचने के लिए कई लाख भारतीयों द्वारा अपनाया जाने वाला एक खतरनाक आव्रजन मार्ग (इमिग्रेशन रूट) है।

अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 के बीच भारत से लगभग 42,000 प्रवासियों ने अवैध रूप से दक्षिणी सीमा पार की है। नवंबर 2022 से, लगभग 97,000 भारतीयों ने अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश की है और अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार किया है। जहां पंजाब के युवा ज्यादातर कनाडा जाते हैं, वहीं हरियाणा के युवाओं की मुख्य डेस्टिनेशन अमेरिका होती है।

अवैध रास्ता न केवल जोखिम के लिहाज से बल्कि आर्थिक रूप से भी महंगा साबित होता है। अमेरिका में एक डंकी ट्रिप की लागत 15-40 लाख रुपये के बीच होती है और 70 लाख रुपये तक जा सकती है। पैसा जितना ज्यादा होगा, यात्रा में परेशानी उतनी ही कम होगी। पुर्तगाल के लिए यह लगभग 15 लाख रुपये, जर्मनी के लिए 25 लाख रुपये और अमेरिका के लिए 45 लाख रुपये है।

कहां से शुरू होता है डंकी रूट

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से सबसे लोकप्रिय डंकी रूट में पहला कदम इक्वाडोर, बोलीविया, गुयाना, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे लैटिन अमेरिकी देशों तक पहुंचना है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांजिट के लिए लैटिन अमेरिकी देश को चुनने के पीछे का कारण यह है कि भारतीयों के लिए इन देशों तक पहुंचना आसान है।

न केवल ये देश भारतीयों के लिए आगमन पर वीजा (वीजा ऑन अराइवल) प्रदान करते हैं, बल्कि जिन देशों को आने से पहले वीजा की आवश्यकता होती है वे भारतीयों को आसानी से पर्यटक वीजा दे देते हैं। इसके अलावा, अवैध इमिग्रेशन का प्रबंधन करने वाले एजेंट इन देशों में स्थित हैं जहां उनके पास अवैध तस्करी के लिए ‘लिंक’ हैं।

दुबई से मेक्सिको भी जाता है डंकी रूट

इसके अलावा, कुछ मामलों में, एजेंट दुबई से मेक्सिको के लिए सीधे वीजा की व्यवस्था करते हैं। लेकिन मेक्सिको में सीधे उतरना खतरनाक माना जाता है क्योंकि स्थानीय अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी का डर होता है। इसलिए, अधिकांश एजेंट अपने ग्राहकों को लैटिन अमेरिकी देश में ले जाते हैं और फिर उन्हें कोलंबिया ले जाते हैं।

कोलंबिया पहुंचने के बाद, प्रवासी पनामा देश में एंट्री करते हैं, जहां रास्ते में उन्हें डेरियन गैप को पार करना होता है, जो दोनों देशों के बीच एक खतरनाक जंगल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जोखिमों में साफ पानी की कमी, जंगली जानवर और आपराधिक गिरोह शामिल हैं जो डकैती और यहां तक कि बलात्कार का कारण बन सकते हैं।

बहुत मुश्किल है ये रास्ता

दर्ज मामलों में से एक में, हरियाणा के जितेंद्र और उनके समूह से जंगल पार करते समय उनके पैसे, फोन और यहां तक कि उनके कपड़े और जूते भी लूट लिए गए। उन्हें ठंड और बर्फ में नंगे पैर चलना पड़ा। यात्रा में आठ से दस दिन लगते हैं और अगर स्थिति बिगड़ जाती है तो या प्रवासी मर जाता है, तो शव को घर वापस भेजने का कोई रास्ता नहीं है।

हालांकि कोलंबिया से एक वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग है जहां प्रवासी पनामा के खतरनाक जंगलों से बचते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह मार्ग सैन एन्ड्रेस से शुरू होता है, जहां अवैध प्रवासियों के साथ मछली पकड़ने वाली नावें सैन एन्ड्रेस से लगभग 150 किलोमीटर दूर फिशरमैन के तक जाती हैं, और फिर मैक्सिको की ओर आगे बढ़ने के लिए दूसरी नाव पर शिफ्ट हो जाती हैं।

पनामा से, प्रवासी लोग अमेरिकी सीमा में प्रवेश के लिए मैक्सिको की ओर जाते हैं और ग्वाटेमाला इस मार्ग पर एक बड़ा समन्वय केंद्र है। पूरी यात्रा में मेक्सिको एक महत्वपूर्ण रास्ता है क्योंकि इसमें सरकारी एजेंसियों से छिपना शामिल है। अमेरिका और मैक्सिको को अलग करने वाली 3,140 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगी हुई है, जिसे प्रवासियों को कूदकर पार करना पड़ता है। कई अन्य लोग खतरनाक रियो ग्रांडे नदी को पार करते हैं। हालांकि, अधिक प्रवासियों को बाड़ पार करने या समुद्र के रास्ते प्रवेश करने के बजाय सीमा पार करने के बाद हिरासत में लिया जाता है।

लैटिन अमेरिकी देश ही क्यों जाते हैं

कई प्रवासियों ने लैटिन अमेरिकी देश के माध्यम से ट्रांजिट के बजाय यूरोप को भी चुना। हालांकि यूरोप से होकर मैक्सिको जाना आसान है, लेकिन यह रास्ता अधिकारियों की नजर में है। बाधाओं और खतरनाक मार्ग के बावजूद, डंकी रूट पंजाब और हरियाणा में अवैध अप्रवास का सबसे लोकप्रिय तरीका है, और इसका विस्तार उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात तक हो गया है।

पंजाब क्षेत्र में काम कर रही वीजा एजेंसियों के एक विशाल नेटवर्क द्वारा अलग-अलग वैधता के साथ लोगों को “गधा मार्ग” की पेशकश की जाती है। ये एजेंसियां अक्सर नियमों को तोड़ती हैं, किसी भी कानूनी खामियों का फायदा उठाती हैं या पूरे यूरोप में आपराधिक तस्करी नेटवर्क के साथ संबंध रखती हैं और कई भारतीय राज्यों में काम करती हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

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