Ram Mandir: राम मंदिर में कैसे हुई अनुकल्प मिश्रा की एंट्री, कैसे बढ़ा कद? चंदा चोरी मामले में बड़े खुलासे

नई दिल्ली: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच सीएम योगी शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे. हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की. इसके राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए. इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मौजूद नहीं थे. इससे पहले सीएम योगी ने साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. दूध का दूध पानी का पानी होगा. रामभक्तों से अपील है कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा का पाठ पढ़ाया है, 500 वर्षों तक राम मंदिर के लिए संघर्ष किया, 15 दिन और देख लो, इंतजार कर लो. उधर, अनुकल्प मिश्रा को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है. सूत्रों का कहना है कि काउंटिंग की जिम्मेदारी मिलने के बाद अनुकल्प ने रिश्तेदारों का एक नेटवर्क तैयार किया. इसके जरिए ही दानराशि में हेराफेरी की बात सामने आ रही है.

दरअसल, SIT जांच 5वें दिन भी जारी है लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है. SIT की टीम ने अब तक 40 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है. कहा जा रहा है कि चंपत राय से SIT ने 2 बार पूछताछ की है. जल्द ही अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की जा सकती है. इस बीच चढ़ावा चोरी मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है.

प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही शुरू हो गया था चोरी का खेल

सूत्रों के मुताबिक, प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही चोरी का खेल शुरू हो गया था. 22 जनवरी 2024 के बाद से बड़े पैमाने पर चोरी हुई. मंदिर से चोरी की रकम करोड़ों तक पहुंच सकती है. शुरूआत में रोज 2-4 लाख नकदी चोरी की जाती थी. बाद में मंदिर से चोरी की रकम कई गुना तक बढ़ गई. जांच के केंद्र में अनुकल्प मिश्रा का नाम आ रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, एक ट्रस्टी की अनुशंसा पर अनुकल्प मिश्रा की नियुक्ति मंदिर में हुई. फिर अनुकल्प को काउंटिंग की जिम्मेदारी मिली. अनुकल्प ने रिश्तेदारों का एक नेटवर्क तैयार किया. इसी नेटवर्क के जरिए दानराशि में हेराफेरी की बात सामने आ रही है. 8 महीने पहले बहनोई लवकुश की नियुक्ति कराई. अनुकल्प का शिफ्ट के कर्मचारियों पर प्रभाव था. उसने कर्मचारियों पर प्रभाव में पूरे सिस्टम पर पकड़ बना ली.

चढ़ावा चोरी का पर्दाफाश कैसे हुआ?

5 जून को ट्रस्ट के लोग अचानक यात्री सुविधा केंद्र पहुंचे. सुरक्षाकर्मी को बुलाकर एक नोट गिनने वाली की तलाशी. तलाशी में कुछ पैसे मिले. फिर उससे गहन पूछताछ हुई. पूछताछ में कर्मचारी ने अनुकल्प,लवकुश के नाम आए. पदाधिकारियों ने इन लोगों को भी रोककर पूछताछ की. पूछताछ के बाद PFC के बाथरूम से बड़ी नकदी मिली.

पूछताछ में पता चला कि कौशलपुरी में इनका अड्डा था. वहीं चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था. उधर, सीएम योगी ने साफ कर दिया है कि राम काज में ‘धोखा’ देने वाला चंदा चोर नहीं बचेगा. इस बीच जांच की आंच कई लोगों तक पहुंच रही है. इसके घेरे में चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा भी हैं. मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.