Ateek Ahmed के करीबी कमर को UP STF ने मेरठ से किया अरेस्टेड, 100 से अधिक की GST चोरी का मामला

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में माफिया अतीक अहमद के रिश्तेदार की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है। फर्जी ई- वे बिल से 100 करोड़ से ऊपर की जीएसटी चोरी के मामले में एसटीएफ मेरठ में माफिया के रिश्तेदार पर कार्रवाई की है। मेरठ निवासी रिश्तेदार की गिरफ्तारी गुरुवार रात की है। मेरठ क्षेत्र निवासी कमर अहमद कई कंपनियों का मालिक बताया जाता है। एसटीएफ मेरठ को सूचना मिली थी कि कमर अहमद माफिया अतीक अहमद का रिश्तेदार है। कई राज्यों में इसका कारोबार चलता है। यूपी एसटीएफ को सूचना मिली थी कि कमर अहमद फर्जी ई- वे बिल से करोड़ों की जीएसटी चोरी कर रहा है। माफिया के रिश्तेदार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और जीएसटी विभाग की ओर से शुक्रवार को कार्रवाई तेज की गई है। इस मामले में जल्द बड़ा खुलासा होने का दावा किया जा रहा है।

मेरठ एसटीएफ ने इसके बाद कमर अहमद की तलाश शुरू की। गुरुवार की रात गढ़ रोड रोड स्थित होटल ब्रॉडवे इन में कमर अहमद को ट्रेस किया गया। इसके बाद एसटीएफ की टीम होटल पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हिरासत में लेकर उसकी पूछताछ की जा रही है। आरोपी की निशानदेही पर दस्तावेज, मोबाइल फोन, कंपनी के कागजात और एक गाड़ी जब्त की गई ।है फर्जी ई- वे बिल से कितने करोड़ की धोखाधड़ी हुई है? इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। सिविल लाइन थाने में कमर अहमद के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की गई जा रही है।

पकड़ा गया कमर अहमद माफिया अतीक अहमद का रिश्तेदार बताया जा रहा है। उसे पकड़ने के बाद सिविल लाइन थाने में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बृजेश सिंह, एसपी, एसटीएफ मेरठ

कंपनियों की जुटाई जा रही जानकारी

कमर अहमद और उससे जुड़े लोगों की तमाम कंपनियों का लेखा- जोखा एसटीएफ की टीम जुटा रही है। इस मामले में माना जा रहा है कि जांच के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, संबंधित जीएसटी विभाग के अधिकारियों को एसटीएफ की ओर से इस मामले में सूचना दी गई है। शुक्रवार से सभी विभाग के अधिकारी इस मामले में अपनी कार्रवाई शुरू कर चुके हैं। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी चोरी का मामला 100 करोड़ से ऊपर का है।

ऐसे चला घपले का खेल

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, कमर अहमद और उसके साथियों ने कुछ लोगों से उनके पैन कार्ड और दूसरे दस्तावेज की कॉपी ली। इसके जरिए जीएसटी नंबर हासिल किया। इन जीएसटी नंबर के आधार पर फर्जी कंपनियां रजिस्टर कर ली। इसके बाद कंपनियों की ओर से कागजी कारोबार दिखाए गए। दरअसल, नए नियमों के तहत अंतिम कड़ी के रूप में कारोबार करने वाले को टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। कमर अहमद फर्जी कंपनियों के आधार पर बताता था कि टैक्स पहले चुकाया जा चुका है। इसलिए टैक्स का भार उस पर नहीं आता है।

इस तरह से फर्जी कंपनियों के आधार पर सरकार से भरे गए टैक्स को भी क्लेम कर वापस लिया जा रहा था। एसटीएफ अधिकारियों की मानें तो इस संबंध में संबंधित विभाग का अधिकारियों को भी रात को ही सूचना दे दी गई है। शुक्रवार को इस मामले में संबंधित अधिकारी अपनी कार्रवाई शुरू करेंगे। वहीं सिविल लाइन थाने में देर रात तक मुकदमे की प्रक्रिया जारी रही।

क्या होता है ई- वे बिल?

जीएसटी भुगतान में ई- वे बिल एक अहम कागजात माना जाता है। ई- वे बिल एक दस्तावेज है, जिस माल एवं सेवा कर अधिनियम के तहत माल ढुलाई में अनिवार्य किया गया है। इसके तहत 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के माल की किसी भी खेप ले जाने वाले वाहन के प्रभारी को यह बिल रखना पड़ता है।

 

 

 

 

 

 

 

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