Skanda Sashti Vrat 2026: ज्येष्ठ माह में कब रखा जाएगा स्कंद षष्ठी का व्रत? जानें डेट, पूजा विधि और महत्व

Jyeshtha Month Skanda Sashti Vrat 2026: षष्ठी तिथि का विशेष महत्व माना गया है. हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है. ये व्रत भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय भगवान को समर्पित किया गया है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान कार्तिकेय की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. उनसे सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजन करने से कार्तिकेय भगवान की कृपा से संतान सुख और बेहतर सेहत मिलती है. स्कंद षष्ठी का व्रत करना बेहद लाभकारी होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास में 19 जून 2026, शुक्रवार के दिन स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाएगा. आइए जानते हैं ज्येष्ठ मास के स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा विधि और महत्व.

स्कंद षष्ठी की पूजा विधि (Skanda Sashti Puja Vidhi)

  • स्कंद षष्ठी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. फिर साप कपड़े पहनें.
  • इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • पूजास्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर रखें.
  • भगवान कार्तिकेय को रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और हल्दी चढ़ाएं.
  • इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं.
  • फिर उन्हें मिठाई और फलों का भोग लगाएं.
  • स्कन्द षष्ठी व्रत कथा का पाठ करें.
  • भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें.
  • अंत में दीपक या कपूर से आरती कर पूजा पूरी करें.

स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व (Skanda Sashti Significance)

प्राचीन काल में तारकासुर नामक राक्षस ने संसार में आतंक और हाहाकार मचाया हुआ था. उस समय शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन भगवान कार्तिकेय ने अत्याचारी राक्षस तारकासुर का वध किया था और संसार व देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. इसके बाद भगवान कार्तिकेय को देवताओं के सेनापति का पद सौंपा गया था. स्कंद षष्ठी का दिन बुराई पर अच्छाई की विजय की जीत का प्रतीक है. मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से भय दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. लाइव खबर अब तकइसकी पुष्टि नहीं करता है.

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