लखीमपुर खीरी समाचार: रिश्वत लेते हुए मुंशी गिरफ्तार, कानूनगो निलंबित

आकाश यादव की रिपोर्ट-

लखीमपुर। मोहम्मदी में 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए मुंशी अशोक को गुरुवार को लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने उसकी 14 दिन रिमांड लेते हुए जेल भेज दिया है। उधर कानूनगो अनंगपाल सिंह फरार है। उसकी तलाश की जा रही है। डीएम ने आरोपी कानूनगो को निलंबित कर दिया है।

उचौलिया थाना क्षेत्र के गांव मठवाल देवता निवासी मकरंद ने बताया कि उसकी भूमि गाटा संख्या 533 क रकबा 0.191 हेक्टेयर पर गांव की ही सुधा देवी का कब्जा है। पीड़ित ने तहसीलदार कोर्ट में अपनी भूमि की पैमाइश करने के लिए 17 दिसंबर को वाद दायर किया है। जिस पर आदेश हो जाने के बाद पैमाइश नहीं हो रही थी। कानूनगो का मुंशी अशोक पाल अधिकारियों के लिए मकरंद से 15 हजार की रिश्वत मांग रहा था। रिश्वत मिलने के बाद ही पैमाइश की बात कही जा रही थी। इसकी जानकारी पीड़ित ने एंटी करप्शन को दी। एंटी करप्शन की प्लानिंग के अनुसार बुधवार को पीड़ित ने 10 हजार रुपये मुंशी को देने के लिए जुटाए। नोटों पर एंटी करप्शन ने एक केमिकल लगा दिया। पीड़ित ने जब मुंशी को रुपये दिए तो एंटी करप्शन की टीम ने उसको रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों दबोच लिया। उसके हाथ पानी में डलवाए गए। जिससे पानी गुलाबी हो गया। एंटी करप्शन की टीम ने कानूनगो की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। टीम गिरफ्तार मुंशी को लेकर कोतवाली सदर पहुंची। यहां दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करवाया। एंटी करप्शन की टीम मुंशी अशोक को लेकर लखनऊ चली गई। लखनऊ में उसे गुरुवार को भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। उधर कानूनगो अनंगपाल सिंह अभी भी फरार बताया जा रहा है। एंटी करप्शन की टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है। एंटी करप्शन टीम की प्रभारी संध्या सिंह ने बताया कि जल्द ही उसको भी गिरफ्तार किया जाएगा। उधर डीएम ने कानूनगो अनंग पाल को निलंबत कर दिया है।

सरकारी आवास में रहता था निजी मुंशी

मोहम्मदी तहसील में किस तरह कामकाज होता है, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिश्वत लेते पकड़ा गया निजी मुंशी सरकारी अवास में रहता था। इस बात का जिक्र एंटी करप्शन की टीम प्रभारी संध्या सिंह ने अपनी रिपोर्ट में भी किया है। उन्होंने लिखा है कि पकड़ा गया मुंशी अशोक कानूनगो के सहायक के रूप में काम करता था। वह पैमाइश की जगह पर जरीब रखने के लिए प्राइवेट तौर पर लगता था। पर उसकी धमक ऐसी थी कि रहने के लिए सरकारी आवास दिया गया था।

15 हजार मांगे थे, दस हजार दिए

एंटी करप्शन टीम की जांच में सामने आया कि कानूनगो ने किसान से पैमाइश कराने के लिए 15 हजार की रिश्वत मांगी थी। पर किसान 10 हजार का इंतजाम ही कर सका। इसके बाद उन्हीं दस हजार के नोटों पर केमिकल लगाया गया। रिश्वत का पैसा मुंशी ने अपने हाथ में लिया। इससे पहले कि कानूनगो दबोचा जाता, वह भाग निकला। पकड़े गए मुंशी ने बताया कि हर काम में उसे सिर्फ एक हजार रुपये ही मिलते हैं।

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