जूनियर हॉकी विश्व कप : स्पेन के खिलाफ कांस्य पदक मैच में भारत को दिखाना होगा दमखम

कुआलालंपुर : अब तक मौकों का फायदा उठाने में नाकाम रही भारतीय टीम को अगर जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप के शनिवार को होने वाले कांस्य पदक के मैच में मजबूत स्पेन को हराना है तो उसे जल्द से जल्द अपने खेल में सुधार करना होगा। भारत ने गुरुवार को जर्मनी के खिलाफ सेमीफाइनल में 12 पेनल्टी कॉर्नर गंवाए जिससे इस मैच में उसे 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। 

इस पराजय से भारतीय टीम का मनोबल गिरा होगा, लेकिन अगर उसे पोडियम (शीर्ष तीन में शामिल) पर पहुंचना है तो स्पेन के खिलाफ अवसरों को भुनाना होगा। पूल चरण के मैच में स्पेन ने भारत को 4-1 से हराया था। स्पेन की टीम भी दूसरे सेमीफाइनल में फ्रांस के हाथों 1-3 से हार के कारण आहत होगी लेकिन वह कांस्य पदक जीतने के लिए किसी तरह की कसर नहीं छोड़ेगी। 

भारतीय टीम भी इस प्रतियोगिता में चौथी बार पोडियम पर पहुंचने की कोशिश करेगी। उसने इस टूर्नामेंट में दो बार (होबार्ट में 2001 और लखनऊ में 2016) स्वर्ण पदक और 1997 में इंग्लैंड के मिल्टन केंस में रजत पदक जीता था। लेकिन उत्तम सिंह की अगुवाई वाली टीम को अगर इस सूची में शामिल होना है तो उसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। भारत के लिए यह प्रतियोगिता मिश्रित सफलता वाली रही है। उसने क्वार्टर फाइनल में विश्व की नंबर चार टीम नीदरलैंड को 4-3 से हराया था लेकिन छह बार के चैंपियन जर्मनी के खिलाफ उसके खिलाड़ी यह लय बरकरार नहीं रख पाए। 

भारतीय कप्तान उत्तम ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई मौके गंवाए लेकिन साथ ही कहा कि उनके पास अब भी पोडियम पर पहुंचने का मौका है और वह इसके लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उत्तम ने कहा, ‘हमें काफी मौके मिले लेकिन हम उनका फायदा नहीं उठा पाए। हमने पेनल्टी कार्नर को गोल में बदलने की कोशिश की लेकिन ऐसा करने में नाकाम रहे। हमें गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत है।’ 

उन्होंने कहा, ‘हम अभी टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुए हैं और हमें कांस्य पदक का मैच खेलना है। जो कुछ भी हुआ उसे हम नहीं बदल सकते हैं। हमारा पूरा ध्यान अब अगले मैच पर है।’ जहां तक स्पेन की बात है तो उसकी टीम अभी तक इस टूर्नामेंट के फाइनल में जगह नहीं बना पाई है। उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2005 में रहा था जब उसकी टीम ने कांस्य पदक जीता था। भारत और स्पेन ने पुरुष जूनियर विश्व कप में अभी तक एक दूसरे के खिलाफ आठ मैच खेले हैं। इनमें से स्पेन ने पांच मैच में जीत दर्ज की है। इस बीच 2021 में भुवनेश्वर में उप विजेता रही जर्मनी की टीम फाइनल में फ्रांस का सामना करेगी। फ्रांस ने पिछली बार कांस्य पदक जीता था। 

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