वोकलिंगा समुदाय के सहारे कर्नाटक फतह की तैयारी में BJP, बनाया जीत का फार्मूला

2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में फिर से जीत हासिल करने के लिए बीजेपी (BJP) ने मुक्कमल प्लान तैयार कर उसे लागू करना शुरू कर दिया है. दक्षिण भारत में बीजेपी के दृष्टि से गेटवे माने जाने वाले इस सूबे में बीजेपी के शीर्षस्थ नेताओं की एक्टिविटी को बढ़ा दिया गया है. विगत 30-31 दिसंबर को दो दिनों के प्रवास पर गृहमंत्री अमित शाह रहकर आए हैं. गृहमंत्री ने मांड्या में पार्टी के ग्रासरूट नेताओं के साथ बैठक कर पार्टी की रणनीति को अमली जामा पहनाने का काम शुरू कर दिया है.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा आगामी 5, 6 और 7 जनवरी को 3 दिवसीय दौरे पर जाएंगे. नड्डा कर्नाटक कार्यकर्ताओं की बैठक और जनसभा संबोधित करेंगे. उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जन्मदिवस पर कर्नाटक के हुबली में 7500 युवाओं की सभा को संबोधित करेंगे. 28 जनवरी को गृहमंत्री अमित शाह फिर एक बार कर्नाटक के हुबली में दौरे पर रहेंगे. जहां वो पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात और सभा को संबोधित करेंगे

बीजेपी का प्लान

कर्नाटक के आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी वोकालिगा वोट पर फोकस करेगी और कर्नाटक के मैसुरू रीजन में अपनी मजबूत पैठ बना जेडीएस के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है. 30 दिसंबर को अपने दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर गए गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी की आंतरिक बैठक में पार्टी नेताओं को कमर कस पूरी ताकत से चुनाव लड़ने का आह्वान किया.

कर्नाटक के मांड्या में जिला की सभा में अमित शाह ने कहा कि पार्टी पूरी ताकत के साथ वोकालिगा इलाके में ज्यादा जोर लगाकर चुनाव लड़ने की तैयारी किया जाए. दरअसल गृहमंत्री को ये फीडबैक मिली थी कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के साथ मीटिंग के बाद उस इलाके के बीजेपी कार्यकर्ताओं में जेडीएस के साथ पार्टी के समझौते की गलतफहमी पैदा हो रही है. लिहाजा उन्होंने कार्यकर्ताओं को ये संदेश दिया कि जेडीएस के साथ कोई समझौता नहीं हो रही और बीजेपी बेहतरीन जातीय समीकरण के साथ मजबूत उम्मीदवार को जेडीएस के गढ़ में पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतारेगी.

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वोकलिंगा समुदाय सबसे बड़ा दूसरा समुदाय

दरअसल, कर्नाटक में लिंगायत के बाद वोकलिंगा समुदाय सबसे बड़ा दूसरा समुदाय है, जिसमें बीजेपी की पकड़ कमजोर रही है. सूबे के लगभग 15% वोटर इसी कम्युनिटी से आते हैं. पूरे प्रदेश में लगभग 60 सीटों को ये वर्ग सीधा प्रभावित करते हैं. कर्नाटक में वोकलिंगा समुदाय का गढ़ ओल्ड मैसूर रीजन माना जाता है. बीजेपी ने इस बार विधानसभा चुनाव में ओल्ड मैसूर रीजन के वो बहुल इलाके में 35 सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा है. 2018 चुनाव में कर्नाटक के 30 जिलों में से ओल्ड मैसूर रीजन के 5 जिलों में बीजेपी ने खाता भी नहीं खोला था.

वोकलिंगा समुदाय के बर्चस्व वाले इस इलाके में जेडीएस का दबदबा रहा है. उसके अलावा कांग्रेस की भी इस वर्ग और क्षेत्र में ठीकठाक पकड़ रही है. इस बार बीजेपी इसी क्षेत्र और वोकलिंगा वर्ग में अपनी स्ट्राइक रेट बढ़ाना चाहती है क्योंकि बीजेपी का मानना है कि ओल्ड मैसूर रीजन में बिना बेहतर परफॉर्म किए सत्ता पर काबिज हो पाना मुश्किल होगा.

वैसे बीजेपी की पकड़ लिंगायत समुदाय में हमेशा ठीक रहती है, कुर्बा, ब्राह्मण और अन्य जातियों में भी पार्टी की पकड़ ठीक है लिहाजा इस बार पूरा फोकस वोकलिग्गा समाज और मैसूर रीजन पर केंद्रित किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस से कुछ बड़े जमीनी और मजबूत वोकालिग्गा समुदाय के नेता भी चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल करवाए जाएंगे.

कर्नाटक सरकार में वोकालिग्गा समुदाय से 7 मंत्री

बीजेपी की मौजूदा कर्नाटक सरकार में वोकालिग्गा समुदाय से 7 मंत्री हैं. इनमें से अस्वथ नारायण और आर अशोक जैसे कई मजबूत नेता भी शामिल हैं. केंद्रीय टीम में भी बीजेपी ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय संगठन में अच्छी पोजिशनिंग दिया है. केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे और राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि भी वोकालिग्गा समाज से हैं. माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल में भी इस वर्ग के नेताओं को मजबूती दिया जा सकता है.

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लाभार्थियों को टारगेट

इसके अलावा बीजेपी ने सूबे के लिंगायत समुदाय के पंचमसाली उपजाति और वोकालिग्गा समुदाय के कुछ उपजातियों को रिजर्वेशन देकर भी अपने ओर आकर्षित करने की रणनीति बनाई है. इसके लिए कर्नाटक सरकार ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत दिए जा रहे 10% आरक्षण को खत्म करने की रणनीति बनाई है. इन तमाम जातिगत और रीजनल आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने सूबे में माइक्रो लेवल पर सघन प्रचार के कार्यक्रम चलाना शुरू कर दिया है, जिससे की रिजर्वेशन से लाभान्वित हो रहे वर्गों को साधा जा सके. बीजेपी ने कर्नाटक में घर घर अभियान को बारीकी से चलाना शुरू कर दिया है. इस अभियान की सफलता के लिए कुछ केंद्रीय नेता जल्द इसमें शामिल होंगे.

कम जनसंख्या वाले जातियों पर फोकस

कर्नाटक के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि छोटे से छोटे संख्या बल वाली जातियों पर भी विशेष ध्यान देना है. सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री ने अपने हालिया बैठक में पार्टी नेताओं को कहा की चुनाव की दृष्टि से एक एक वोट महत्वपूर्ण होता है लिहाजा कम संख्याबल वाली जातियों को भी हमें जोड़ना है.

नए चेहरों को मौका और पुराने से निजात

नेताओं के आपसी रस्साकसी को कम करने के भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और काफी हद तक उसमें कमी भी आई है. बीजेपी का कहना है सूबे के सबसे बड़े पार्टी नेता बीएस येदियुरप्पा पार्टी के मार्गदर्शक के तौर पर पूरी ताकत से चुनाव में लगेंगे जबकि मौजूदा सीएम वसवराज बोम्मई पार्टी के नेता होंगे. माना जा रहा है कि जल्द ही बीजेपी एक कैंपेन कमिटी बनाकर पार्टी के प्रमुख नेताओं को उसमें शामिल करेगी.

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इसके आलावा एंटी इंकम्बेंसी को कम करने के लिए सूबे के सीनियर नेताओं से अलग युवा नेताओं को टिकट में प्राथमिकता देने की योजना भी बनाई गई है. नेताओं के जेनेरेशनल शिफ्ट के तहत माना जा रहा है कि सूबे में 25% नए चेहरों को मौका दिया जायेगा साथ ही कम से कम 2 दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं को इस बार चुनाव नहीं लड़ने के लिए राजी किया जायेगा.

विस्तारकों का उपयोग

बीजेपी ने कर्नाटक के 224 विधानसभा क्षेत्रों में एक एक विस्तारक रखकर जमीन पर इंटेंस कैपेनिंग और आम लोगों के घर घर तक पहुंचने की प्लानिंग की है. इसके आलावा केंद्रीय योजनाओं से लाभान्वित हुए लाभार्थियों तक पहुंचने और उनके आगे की आकांक्षा को समझने की कोशिश भी ग्राउंड लेवल पर की जा रही है. बीजेपी का मानना है राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा का कर्नाटक में कोई बड़ा असर नहीं हुआ है. बीजेपी का दावा है कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद कर्नाटक में दो स्थानीय निकाय चुनाव चामराजनगर और बीजापुर में हुए लेकिन दोनों जगह कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.

 

 

 

 

 

 

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