Nepal plane crash: डीएनए टेस्ट और ऑटोप्सी के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे 5 भारतीयों के पार्थिव शरीर

नेपाल के पोखरा में रविवार को हुई विमान दुर्घटना में 72 यात्रियों में से अब तक 71 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं जिसमें पांच भारतीय भी शामिल थे। गाजीपुर जिले के चार युवकों के परिजन मंगलवार को काठमांडू पहुंच गए, और वे वहां पर अपने प्रियजन के जले हुए शव की पहचान करेंगे जिससे पार्थिव शरीर को सौंपने से जुड़ी सभी तरह की औपचारिकताएं पूरी की जा सके. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि डीएनए टेस्ट और ऑटोप्सी के बाद शवों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इस बीच योगी सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है.

यति एयरलाइंस विमान हादसे में मारे गए दो और यात्रियों के शव मिलने के बाद मंगलवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 71 हो गई है. वहीं अधिकारियों ने परिजनों को शवों को सौंपना शुरू कर दिया है. यति एयरलाइंस का एटीआर-72 विमान चार दिन पहले रविवार को पोखरा के नवनिर्मित एयरपोर्ट पर उतरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. विमान में चालक दल के चार सदस्यों और पांच भारतीयों समेत 72 लोग सवार थे, इनमें से 71 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है और अन्य एक की तलाश जारी है.

हादसे में मारे गए लोगों में से पांच भारतीयों में चार गाजीपुर और एक बिहार का रहने वाला था. उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के पीड़ितों की पहचान सोनू जायसवाल, 35, अनिल कुमार राजभर (27), अभिषेक कुशवाहा (27) और विशाल शर्मा (22) गाजीपुर के रूप में की गई, जबकि संजय जायसवाल (26) बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे.

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नेपाल बॉर्डर पर 12 घंटे का इंतजार करना पड़ा

शवों की पहचान की सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए नेपाल दूतावास की ओर से जिला प्रशासन से संपर्क किए जाने के बाद तहसीलदार (कासिमाबाद) जया सिंह मृतकों (गाजीपुर से) के परिवार के सदस्यों के लगातार संपर्क में हैं. अधिकारी ने बताया, “डीएनए मैच होने के बाद ही मानव अवशेषों को सौंपने काम शुरू किया जाएगा. हालांकि प्रशासन को अभी यह नहीं बताया गया है कि पार्थिव शरीर को जिला अधिकारियों को कैसे और कब भेजे जाएंगे. काठमांडू से शव मिलने के बाद शवों को उनके परिवारवालों को सौंप दिया जाएगा.”

एक अधिकारी और एक पुलिस कांस्टेबल के साथ परिवार के पांच सदस्यों का ग्रुप सोमवार दोपहर करीब 3 बजे काठमांडू के लिए रवाना हुआ था. उन्होंने अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें नेपाल बॉर्डर पर करीब 12 घंटे तक इंतजार कराया गया. मंगलवार को जनता के लिए खोले जाने के बाद उन्होंने सुबह 9:30 बजे बॉर्डर पार किया.

अब और इंतजार हमारे लिए असहनीयः पिता राजेंद्र

मृतक सोनू जायसवाल के पिता राजेंद्र जायसवाल ने कहा, “हम अपने बेटे की मौत से पहले ही सदमे में हैं और अब 12 घंटे का इंतजार हमारे लिए असहनीय रहा. अब हम काठमांडू पहुंच गए और शव की पहचान की औपचारिकताएं पूरी कर ली है.”

राजेंद्र जायसवाल, उनके रिश्तेदार विजय जायसवाल, अनिल राजभर के पिता रामदास राजभर, विशाल शर्मा के भाई विश्वजीत शर्मा और अभिषेक कुशवाहा के बड़े भाई अभिनेश कुशवाहा परिवार के ये पांच सदस्य हैं जिन्हें नेपाल भेजा गया है.

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हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा था कि उत्तर प्रदेश के मृत लोगों के पार्थिव शरीर को राज्य में लाने की व्यवस्था करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे.

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल मंगलवार को नेपाल हादसे में मारे गए गाजीपुर जिले के निवासी चार युवकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने और मृतकों के पार्थिव शरीर को घर लाने में होने वाला खर्च वहन करने का ऐलान किया है.

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया, “नेपाल विमान हादसे में मरे गाजीपुर के चार लोगों के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. मृतकों के पार्थिव शरीर को काठमांडू से उनके घर तक लाने में होने वाले खर्च का वहन राज्य सरकार करेगी.”

सड़क मार्ग से लाए जाएंगे सभी शव

गौरतलब है कि नेपाल में रविवार को हुई विमान दुर्घटना में मारे गए गाजीपुर के चार युवकों के परिजनों को सोमवार को जिला प्रशासन ने सड़क मार्ग से काठमांडू भेज दिया और उचित प्रक्रिया के बाद उन्हें शव सौंप दिए जाएंगे. गाजीपुर की जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने बताया कि नेपाल विमान हादसे में चार युवकों अभिषेक कुशवाहा, सोनू जायसवाल, विशाल शर्मा और अनिल कुमार राजभर की मौत हो गई थी. उनके परिवारों में से एक सदस्य और ग्राम प्रधान को प्रशासन द्वारा सड़क मार्ग से नेपाल भेजा गया है.”

उन्होंने कहा, “शवों को उचित पहचान और प्रक्रिया का पालन करने और सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा. शवों को सड़क मार्ग से जिले में लाया जाएगा. इसमें दो-तीन दिन लग सकते हैं.”

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