महराजगंज। जिले में पराली जलाने की घटनाएं लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। तमाम जागरूकता अभियान और कड़ी कार्रवाई के बावजूद किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। रविवार को सेटेलाइट से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 34 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। इन सूचनाओं के आधार पर जिला प्रशासन ने संबंधित स्थानों पर टीम भेजकर मामलों का सत्यापन किया और दोषी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
जिला कृषि अधिकारी वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए गांव-गांव में चौपाल लगाई जा रही है, जहां किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले में पराली जलाने की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब तक 110 किसानों के खिलाफ 1,70,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
इसके अलावा शासन के निर्देशानुसार पांच कंबाइन मशीनों को तब तक सीज रखा गया, जब तक उनमें स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) नहीं लगवाया गया। निचलौल थाना क्षेत्र में एक किसान के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
जिन किसानों पर पराली जलाने के मामले में कार्रवाई हुई है, उनकी किसान सम्मान निधि रोकने के लिए कृषि विभाग ने सूची बनाकर निदेशालय को भेज दी है।
पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि जिले की वायु गुणवत्ता भी खराब हो रही है। रविवार को महराजगंज का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 150 के करीब पहुंच गया। पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) का स्तर 55.3 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, यह स्थिति संवेदनशील लोगों के लिए हानिकारक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वायु गुणवत्ता का आदर्श स्तर 50 या इससे कम होना चाहिए। AQI का 150 के करीब पहुंचना श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए खतरनाक है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर संवेदनशील समूह जैसे बुजुर्ग, बच्चे और सांस के रोगी।
पराली जलाने को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सभी एसडीएम, कृषि विभाग के अधिकारियों, राजस्व कर्मियों और पुलिस कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके बावजूद किसानों में जागरूकता की कमी और वैकल्पिक व्यवस्था की अनुपलब्धता इस समस्या को बढ़ा रही है।