इन 3 नेताओं की हां के बिना कैसे आगे बढ़ेंगे राहुल गांधी, 2024 से पहले चाहिए इसका जवाब

नई दिल्ली: एक छोटे से ब्रेक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में दोबारा से भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत हुई। नए साल की शुरुआत में राहुल गांधी को लेकर कुछ अच्छी खबरें भी सामने आईं। इस साल कई राज्यों में चुनाव है और फोकस लोकसभा चुनाव 2024 पर है। लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के सामने विपक्ष की अगुवाई कौन करेगा इसको लेकर कई सवाल हैं लेकिन विपक्षी दलों के बीच से ही कुछ दल राहुल गांधी के नाम पर सहमत होते दिख रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस के समर्थन को लेकर दक्षिण से अच्छी खबर आई जिसमें तमिलनाडु के सीएम और डीएमके चीफ ने अपना समर्थन दिखाया। वहीं इसके बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार की ओर से कहा जाता है कि अगले आम चुनाव में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर जोर देने से उन्हें कोई समस्या नहीं है। यह बड़ा बयान था क्योंकि वह खुद भी इस रेस में शामिल हैं। इसके साथ ही शिवसेना की ओर से भी समर्थन आता दिखा। राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों के लिए अच्छी खबर है लेकिन विपक्ष की अगुवाई में अभी कई रोड़े हैं। राहुल गांधी ही विपक्ष के उम्मीदवार होंगे इसके लिए तीन ऐसे नाम हैं जिनकी हां पर बहुत कुछ निर्भर होगा।

राहुल गांधी के नाम पर किसने क्या कहा

पटरी पर लौट रही है कांग्रेस: इस कड़ी में सबसे पहला नाम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके चीफ एम.के. स्टालिन का है। स्टालिन ने हाल ही में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सहयोगी दल कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता या महत्व खो दिया है। स्टालिन ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए एक राष्ट्रीय गठबंधन की हिमायत की। इसमें देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी शामिल हो। स्टालिन ने कहा कांग्रेस पटरी पर लौट रही है, जिसकी भारत को अभी जरूरत है। यह पार्टी फिर से उभरने की राह पर है। स्टालिन ने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं को बचाने की खातिर भाजपा का मुकाबला करने के लिए एक राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की जरूरत है।

जब नीतीश ने कहा राहुल के नाम पर समस्या नहीं:
बिहार में जब नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़ा और आरजेडी के साथ सरकार बनाई तब यह चर्चा सबसे अधिक शुरू हुई कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष का चेहरा नीतीश कुमार हो सकते हैं। हालांकि नीतीश कुमार ने अपनी ओर से कुछ नहीं बोला लेकिन जेडीयू और आरजेडी की ओर से उनका नाम उछाला गया। हालांकि अब इस राह पर वह अपने कदम पीछे खींचते हुए दिख रहे हैं। नीतीश कुमार ने कुछ ही दिन पहले कहा कि बिहार में उनकी सहयोगी कांग्रेस की ओर से अगले आम चुनाव में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर जोर देने से उन्हें कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा मैं एक बार फिर स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं स्वयं दावेदार नहीं हूं। बेशक, मेरा दृढ़ विश्वास है कि अधिक से अधिक बीजेपी विरोधी दलों को एक साथ आना चाहिए।


राहुल गांधी के नेतृत्व को नई चमक :
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने कहा कि पिछले वर्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नेतृत्व प्रभावशाली रहा और ऐसा ही 2023 में क्रम जारी रहा तो अगले आम चुनाव में देश में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय मंत्री अमित शाह को नफरत और विभाजन के बीज नहीं बोने चाहिए। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा सुलझ गया है, इसलिए इस मामले पर अब कोई वोट नहीं मांगे जा सकते। इसलिए लव जेहाद का एक नया पेंच तलाशा जा रहा है। क्या लव जेहाद का यह नया हथियार चुनाव जीतने के लिए और हिंदुओं के बीच भय फैलाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। राउत ने दावा किया कि 2022 ने राहुल गांधी के नेतृत्व को नई चमक और प्रभाव प्रदान किया है। यदि 2023 में यही क्रम जारी रहा तो हम 2024 (आम चुनाव) में बदलाव देख सकेंगे।

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क्या ये नेता राहुल गांधी के नाम पर होंगे तैयार
अभी तक जिनका समर्थन एक तरीके से हासिल हुआ है उसमें नीतीश कुमार का नाम महत्वपूर्ण है क्योंकि वह भी इस दौड़ में हैं। हालांकि अभी तीन ऐसे नाम हैं जिनका स्टैंड बहुत कुछ क्लियर करेगा कि राहुल गांधी विपक्ष का चेहरा होंगे या नहीं।

ममता बनर्जी:
ममता बनर्जी का स्टैंड क्या होगा यह विपक्ष के लिए और खासकर राहुल गांधी के लिए काफी अहम होगा। बंगाल में टीएमसी की सरकार है और वहां ममता बनर्जी ने बीजेपी को मात दी है। ममता बनर्जी खुद इस रेस में शामिल हैं। बंगाल में जीत के बाद उन्होंने दिल्ली की तरफ कदम बढ़ाए। हालांकि कांग्रेस को उनका यह प्रयास काफी हद तक रास नहीं आया। अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या वह राहुल गांधी के नाम पर तैयार होंगी या वह इस रेस में बनी रहेंगी। उनका स्टैंड विपक्षी एकता को लेकर काफी अहम होगा।

अरविंद केजरीवाल: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी इस रेस में शामिल हैं। हालांकि उनका स्टैंड बाकी विपक्षी दलों से थोड़ा अलग है। पार्टी अपने आप को बीजेपी का विकल्प बता रही है। दिल्ली और पंजाब दो राज्यों में पार्टी की सरकार है और गुजरात में पार्टी का वोट प्रतिशत ठीक रहा। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले क्या अरविंद केजरीवाल किसी और के नाम पर राजी होंगे यह देखने वाली बात होगी। यदि उनकी पार्टी अकेले इस राह पर आगे बढ़ती है तो फिर से विपक्षी एकता पर बड़ा सवाल होगा।

अखिलेश यादव:
यूपी के पूर्व सीएम और सपा चीफ अखिलेश यादव का स्टैंड काफी अहम होगा। यूपी में विपक्ष की ओर से सबसे मजबूत पार्टी सपा ही है। अभी हाल ही में भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के सवाल पर उनका जो जवाब आया उसको देखते हुए कई सवाल हैं। यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं जो कि देश में किसी एक राज्य की सबसे अधिक हैं। चुनाव से पहले किन विपक्षी दलों के बीच यहां गठबंधन होगा यह काफी अहम है। सपा के साथ ही बसपा और कांग्रेस है। किसके साथ कौन जाएगा या अकेले … इस बात पर विपक्षी एकता टिकी है। वहीं अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के दूसरे को काफी सपोर्ट करते हैं। ममता बनर्जी और राहुल गांधी किसी एक नाम को चुनना भी अखिलेश यादव के लिए काफी मुश्किल होगा। हालांकि यह काफी हद तक यूपी के समीकरण पर निर्भर होगा।

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