H3N2 Virus : एच3एन2 वायरस क्या है? जानें, कितना है खतरनाक और किन अंगों पर डालता है असर?

Health News: एक तरफ जहां पूरी दुनिया में एक बार फिर कोरोना (Corona) का संभावित खतरा है वहीं अब H3N2 वायरस (H3N2 Virus) ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले कुछ दिनों में भारत मे भी H3N2 वायरस (H3N2 Virus) के कई मरीज मिले हैं, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाने वाले हैं. इस बीमारी के दस्तक से स्वास्थ्य चिंता और बढ़ गई है. हालांकि अभी यह कंट्रोल में है.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक डॉ डैंग्स लैब के CEO डॉक्टर अर्जुन डांग ने बताया कि H3N2 वायरस और कुछ नहीं बल्कि एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा ए (influenza A) है. यह फ्लू एक संक्रामक श्वसन वायरस (Infectious Respiratory Virus) है जो नाक, गले, ऊपरी श्वसन पथ और कुछ मामलों में फेफड़ों को भी प्रभावित करता है. ये वायरस आमतौर पर हर सर्दी या फ्लू के मौसम में इन्फ्लूएंजा की मौसमी महामारी (Seasonal Epidemic) का कारण बनते हैं.

H3N2 के कई मरीज मिले
डॉ अर्जुन डांग ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में हमें 100 से अधिक परीक्षण ऐसे मिले हैं जिनमें से बहुत से H3N2 के पॉजिटिव मरीज हैं. हालांकि उनकी हालत ज्यादा गंभीर नहीं है, लेकिन संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि से स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि भारत में अभी इतनी गंभीर स्थिति नहीं है, लेकिन इससे सुरक्षा बेहद जरूरी है. डॉ अर्जुन डांग ने कहा कि यह देखना दिलचस्प है कि हमें H1N1 के कम पॉजिटिव मिल रहे हैं.

क्या है H3N2 वायरस
H3N2 वायरस या स्वाइन फ्लू वायरस एक गैर-मानव इन्फ्लूएंजा वायरस है जो आम तौर पर सूअरों में फैलता है और ये मनुष्यों को भी संक्रमित करता है. आमतौर पर सूअरों में फैलने वाले वायरस ‘स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस’ होते हैं. जब ये वायरस इंसानों को संक्रमित करते हैं, तो उन्हें ‘वैरिएंट’ वायरस कहा जाता है. 2011 में पहली बार एवियन, स्वाइन और मानव फ्लू वायरस के जीन और 2009 की H1N1 महामारी के वायरस के M जीन के साथ एक विशिष्ट H3N2 वायरस का पता चला था. यह वायरस 2010 से सूअरों में फैल रहा था और पहली बार 2011 में लोगों में इसका पता चला था. 2009 के M जीन को शामिल करने से यह वायरस अन्य स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस की तुलना में लोगों को अधिक आसानी से संक्रमित कर सकता है.

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सुअरों से इंसानों में ऐसे फैलता है
H3N2 के इंसानों में फैलने को लेकर ऐस माना जाता है कि इसका संक्रमित सूअरों से इंसानों में फैलना उसी तरह होता है जैसे मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरस लोगों के बीच फैलता है. ये मुख्य रूप से संक्रमित सुअर के खांसने या छींकने पर बनने वाली संक्रमित बूंदों के माध्यम से फैलता है. अगर ये बूंदें आपकी नाक या मुंह में गिरती हैं, या आप इन्हें अंदर लेते हैं, तो आप संक्रमित हो सकते हैं. इस बात के भी कुछ प्रमाण हैं कि आप किसी ऐसी चीज को छूने से संक्रमित हो सकते हैं, जिस पर वायरस है और फिर अपने मुंह या नाक को छूने से आप संक्रमित हो सकते हैं. संक्रमित होने का तीसरा संभावित तरीका इन्फ्लूएंजा वायरस युक्त कणों को सांस से भीतर लेना है. वैज्ञानिक वास्तव में निश्चित नहीं हैं कि प्रसार के इन तरीकों में से कौन सा सबसे आम है.

 

 

 

 

 

 

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