न्योता, नकार, तकरार से ‘थैंक्यू’ तक… ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के लिए यूं चला अखिलेश-राहुल में संवाद

 

लखनऊः उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही यह भी तय हो गया है कि कभी राहुल गांधी की कांग्रेस के साथ उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उतरने वाली समाजवादी पार्टी इस यात्रा में हिस्सा नहीं लेगी। अखिलेश यादव ने एक चिट्ठी लिखकर राहुल गांधी को अपनी शुभकामनाएं भेज दी हैं। वह पहले भी कह चुके हैं कि भारत जोड़ो यात्रा को लेकर उनकी भावनाएं कांग्रेस के साथ हैं लेकिन दोनों ही पार्टियों के सिद्धांत अलग हैं। साफतौर पर तो नहीं लेकिन तभी इशारों में उन्होंने कह दिया था कि वह राहुल गांधी की इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे। इन सबको लेकर राहुल और अखिलेश दोनों ही की ओर से लंबी कवायद चली और नतीजा फिर भी वही रहा, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों गाजियाबाद, बागपत और शामली से होकर गुजरने वाली है। यूपी में यात्रा की कुल दूरी सिर्फ 130 किमी है। इस बेहद संक्षिप्त यात्रा में कांग्रेस की कोशिश थी कि प्रदेश के विपक्षी दलों का साथ लेकर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चे का संदेश जनता में ज्ञापित कर सके। इसके लिए पार्टी ने प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टियों के नेताओं को यात्रा में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा था। इसमें मायावती, अखिलेश यादव, जयंत चौधरी और ओम प्रकाश राजभर भी शामिल थे।

मायावती-जयंत का साफ इनकार
मायावती की पार्टी ने उनके इस यात्रा में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, मायावती ने यात्रा शुरू होने से पहले एक ट्वीट में राहुल को न्योता देने के लिए धन्यवाद भी दिया। जयंत चौधरी ने अपनी व्यस्तता का हवाला देकर यात्रा के लिए न्योते से किनारा कर लिया। यह यात्रा उन्हीं इलाकों में हो रही है, जहां आरएलडी काफी प्रभावी हालात में है। ओम प्रकाश राजभर भी मीटिंग करके फैसला लेने की बात कहकर न्योते को स्वीकार करने के सवाल से पलट गए।

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अखिलेश की ‘भावनाएं’ ही ले पाए राहुल
अखिलेश यादव से जब यह सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के साथ उनकी भावनाएं हैं। निमंत्रण के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि उन्हें कोई न्योता नहीं मिला है। मीडिया में जो बातें चल रही हैं, वह चंडूखाने की गप्प हैं। इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर जब यही सवाल किया गया तो अखिलेश थोड़े चिड़चिड़ा गए। उन्होंने दोबारा वही बातें कहीं कि उनकी भावनाएं भारत जोड़ो यात्रा के साथ हैं लेकिन कांग्रेस और सपा का सिद्धांत अलग-अलग है। उन्होंने गंभीर मुद्रा बनाकर यह भी कह दिया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों एक ही हैं।

जब अखिलेश से राहुल ने जोड़ा ‘रिश्ता’
उनके इस आरोप के बाद राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की अपनी 9वीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश से अपना ‘रिश्ता’ जोड़ लिया। राहुल ने कहा, ‘अखिलेश जी, मायावती जी मोहब्बत का हिंदुस्तान चाहते हैं, मैं जानता हूं। नफरत का हिंदुस्तान नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि उनके साथ रिश्ता तो है। भारत जोड़ने और नफरत मिटाने का रिश्ता उनके साथ है।’ राहुल ने जब ये बात कही तो लगा कि वह भारत जोड़ो यात्रा में यूपी के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को जोड़ने के लिए उन्हें साधने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन तभी उन्होंने उसी कॉन्फ्रेंस में एक और बयान दे दिया, जिससे सपा चिढ़ गई।

सपा नैशनल पार्टी नहीं हैः राहुल
राहुल ने कहा, ‘अगर आप सपा को देखें तो उनके पास एक नैशनल विचारधारा नहीं है। यूपी में जरूर उनकी पोजिशनिंग है। उसको डिफेंड करना है तो हो सकता है कि वो (हमारे साथ) न आएं लेकिन सपा का आइडिया केरल, कर्नाटक में नहीं चल सकता। बिहार में भी नहीं चलेगा।’ राहुल के इस बयान पर सपा ने पलटवार भी किया और अपनी विचारधारा को गांधी और दक्षिण अफ्रीका के लोकप्रिय नेता नेल्सन मंडेला तक से जोड़ दिया।

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सपा ने कांग्रेस को सुनाई खरी-खोटी
सपा के मीडिया सेल ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, ‘राहुल गांधी कह रहे कि सपा की कोई राष्ट्रीय विचारधारा नहीं। राहुल गांधी ये जान लें कि समाजवादी विचारधारा सिर्फ देश ही नहीं पूरे विश्व में है। भगत सिंह, लोहिया जी, नेल्सन मंडेला, महात्मा गांधी जैसे विश्व क्रांतिकारी और नेता समाजवादी विचारधारा के ही थे। हां कांग्रेस की कोई विचारधारा नहीं। कांग्रेस वैचारिक पार्टी नहीं बल्कि सत्ताप्रेमी दल है। भाजपा और कांग्रेस की विचारधारा इस मामले में मिलती-जुलती है। इन दोनों दलों को हर कीमत पर सत्ता चाहिए। उसके लिए चाहे जो समझौते करने पड़े लेकिन समाजवादी विचारधारा संविधान का पालन करती है।’

इतना ही नहीं, सपा ने एक और ट्वीट के जरिए राहुल गांधी को समाजवाद और संविधान पढ़ने की भी सलाह दे डाली। पार्टी ने कहा, ‘विश्व के तमाम देश आज भी समाजवादी विचारधारा पर चलते हैं ,समाजवाद ही मानव सभ्यता का मूल है लेकिन भाजपा हो या कांग्रेस ,इनकी कोई विचारधारा न थी, न है, न ही आगे कोई संभावना है। राहुल गांधी समाजवाद और संविधान को पहले पढ़ें, तब बयानबाजी करें। समाजवाद तो संविधान में भी निहित है।’

अखिलेश ने भी कांग्रेस को सुनाया
अखिलेश यादव से जब राहुल के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में जब कमलनाथ की सरकार बनानी थी तब वह सपा का ही विधायक खोज रहे थे।अखिलेश ने कहा कि सपा लगातार राष्ट्रीय पार्टी बनने की कोशिश कर रही है। नेताजी के समय में कई प्रदेश में पार्टी के विधायक रह चुके हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए सपा के विधायकों को ढूंढ रहे थे। उन्हीं के समर्थन से सरकार बनी। महाराष्ट्र में जब सरकार बनाने की चर्चा थी, तब भी सपा के विधायकों का सहयोग मांग रहे थे।

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अखिलेश ने कहा, नेताजी ने लोकसभा की सीटों पर राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशियों को समर्थन देकर जिताया। कांग्रेस वालों को सपा के बारे में यह नहीं कहना चाहिए कि वह राष्ट्रीय पार्टी नहीं है। नेहरू से समाजवादी नेता लोहिया खर्चों को लेकर जो सवाल पूछते थे, वो आज भी चर्चा में हैं। सपा आने वाले समय में राष्ट्रीय पार्टी बनेगी।

अखिलेश ने चिट्ठी लिख राहुल को कहा धन्यवाद
भारत जोड़ो यात्रा के निमंत्रण को लेकर बात शुरू हुई और समाजवाद की व्याख्या तक पहुंच गई। इस पूरी बहस के बीच आखिरकार कांग्रेस ने सपा मुखिया को आमंत्रण पत्र भेज ही दिया लेकिन फिर भी अखिलेश ने यात्रा में शामिल होने के लिए हामी नहीं भरी। उन्होंने राहुल को एक चिट्ठी लिखकर ‘थैंक्यू’ बोल दिया। अपनी चिट्ठी में अखिलेश ने लिखा, ‘प्रिय राहुल जी, भारत जोड़ो यात्रा में निमंत्रण के लिए धन्यवाद एवं भारत जोड़ो की मुहिम की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।’

अखिलेश ने आगे लिखा, ‘भारत भौगोलिक विस्तार से अधिक एक भाव है, जिसमें प्रेम, अहिंसा, करूणा, सहयोग और सौहार्द्र ही वो सकारात्मक तत्व हैं, जो भारत को जोड़ते हैं। आशा है ये यात्रा हमारे देश की इसी समावेशी संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगी।’

गाजियाबाद में राहुल को सिर्फ टिकैत का साथ
अब यह तय हो गया है कि अखिलेश भारत जोड़ो यात्रा में शामिल नहीं होने वाले हैं। गाजियाबाद में राहुल की यात्रा शुरू भी हो गई है और खबर है कि विपक्ष के बड़े नेता के नाम पर उनके साथ सिर्फ किसान नेता राकेश टिकैत ही दिखेंगे। टिकैत भी संसदीय राजनीति से काफी दूर हैं लेकिन वेस्ट यूपी की कुछ सीटों पर उनके प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। वह भाजपा के खिलाफ मोर्चे के एक महत्वपूर्ण नेता के तौर पर भी जाने जाते हैं।

 

 

 

 

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