आम की खेती करने वाले किसान इन बातो का रखे ख्याल, मंजर में नहीं लगेगा रोग, मिलेगी ज्यादा पैदावार

आम के फूलने और फल लगने की प्रक्रिया काफी हद तक मौसम की स्थिति पर निर्भर करती है. बिहार और उत्तर प्रदेश सहित देश के उत्तरी भाग में आम के पेड़ अब धीरे धीरे गर्भावस्था की शुरुआत में आने लगे हैं. आम के फूलों के लिए आदर्श मौसम की स्थिति उच्च आर्द्रता और 30-37 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान होता है. तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि के बाद, ठंडे तापमान (आमतौर पर 25-30 डिग्री सेल्सियस के बीच) की अवधि से फूल आना शुरू हो जाता है.

देश के जाने में फल वैज्ञानिक डॉक्टर एसके सिंह बताते हैं कि जनवरी और फरवरी का महीना आम के बागों के लिए महत्वपूर्ण होता है.

आम के पेड़ आमतौर पर देर से सर्दियों या शुरुआती वसंत में खिलते हैं. हालांकि, अगर इस समय अवधि के दौरान मौसम आदर्श नहीं है, तो यह फूल आने में देरी कर सकता है. उदाहरण के लिए, यदि ठंडे तापमान की अवधि के दौरान यह बहुत गर्म या बहुत ठंडा है, तो फूल आने में देरी होगी. यदि यह गर्म तापमान अवधि के दौरान बहुत अधिक शुष्क है, तो फूलों के फल लगने की संभावना कम होगी.

इन कीटों की संख्या ज्यादा होती है

आम के बाग से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए आम के बाग में मधुमक्खी की कालोनी बक्से रखना अच्छा रहेगा. इससे परागण अच्छा होता है तथा फल अधिक मात्रा में लगता है. जिन आम के बागों का प्रबंधन ठीक से नहीं होता है वहां पर हापर या भुनगा कीट बहुत सख्या में हो जाते है. अतः आवश्यक है कि सूर्य का प्रकाश बाग में जमीन तक पहुचे जहां पर बाग घना होता है. क्योंकि वहां भी इन कीटों की संख्या ज्यादा होती है.

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परागण कम होता है तथा उपज प्रभावित होती है

पेड़ पर जब मंजर आते हैं तो ये मंजर इन कीटों के लिए बहुत ही अच्छे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनकी वजह से इन कीटों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है. इन कीटों की उपस्थिति का दूसरी पहचान यह है कि जब हम बाग के पास जाते है तो झुंड के झुंड कीड़े पास आते है. यदि इन कीटों को प्रबंन्धित न किया जाय तो ये मंजर से रस चूस लेते हैं और मंजर झड़ जाता है. खास बात यह है कि जब प्रति बौर 10-12 भुनगा दिखाई दे, तब हमें इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1 मीली दवा / 2 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए. यह छिड़काव फूल खिलने से पहले करना चाहिए. नहीं तो बाग में आने वाले मधुमक्खी के किड़े प्रभावित होते हैं, जिससे परागण कम होता है तथा उपज प्रभावित होती है.

इस समय इस बीमारी का कहर जारी है

डॉक्टर सिंह के मुताबिक, मिली बग से बचाव करना जरूरी है. इस कीट के प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि दिसम्बर- जनवरी में बाग के आस पास सफाई करके मिट्टी में क्लोरपायरीफास 1.5 डी. धूल @ 250 ग्राम /पेड़ का बुरकाव कर देना चाहिए. साथ ही गुजिया कीट पेड़ पर न चढ़ सकें. इसके लिए एल्काथीन की 45 सेमी की पट्टी आम के मुख्य तने के चारों तरफ सुतली से बांध देना चाहिए. ऐसा करने से यह कीट पेड़ पर नहीं चढ़ सकेगा. यदि आप ने पूर्व में ऐसा नहीं किया है एवं गुजिया कीट पेड़ पर चढ गया हो तो ऐसी अवस्था में डाएमेथोएट 30 ई.सी. या क्विनाल्फोस 25 ई.सी.@ 1.5 मीली दवा / लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए.

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इस रोग की उग्रता में कमी अपने आप आने लगती है

पाउडरी मिल्डयू/ खर्रा रोग के प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि मंजर आने के पूर्व घुलनशील गंधक @ 2 ग्राम / लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. जब पूरी तरह से फल लग जाय तब इस रोग के प्रबंधन के लिए हेक्साकोनाजोल @ 1 मीली0/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. जब तापक्रम 35०C से ज्यादा हो जाता है. तब इस रोग की उग्रता में कमी अपने आप आने लगती है.

फल के झड़ने की सम्भावना बनी रहती है

टिकोलो (आम के छोटे फल) को गिरने से रोकने के लिए आवश्यक है कि प्लेनोफिक्स @ 1 मी.ली. दवा/ 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. गुम्मा व्याधि से ग्रस्त बौर को काट कर हटा देना चाहिए. आम के फल जब मटर के दाने के बराबर हो जाये तो सिंचाई प्रारम्भ कर देना चाहिए.उसके पहले बग में सिंचाई नहीं करना चाहिए. अन्यथा फूल झड़ सकते हैं. फल के मटर के दाने के बराबर हो जाने के बाद बाग की मिट्टी को हमेशा नम रहना आवश्यक है. अन्यथा फल के झड़ने की सम्भावना बनी रहती है.

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