रेडियो रिपेयर करनेवाले अमर बोस ने ऐसे खड़ी कर दी टॉप साउंड सिस्टम कंपनी BOSE

 

नोनी गोपाल बोस एक स्वतंत्रता सेनानी थे. अंग्रेज जब पीछे पड़े तो उन्हें अमेरिका जाना पड़ा. 1920 में अमेरिका पहुंचे, अमेरिकी महिला से शादी की और फिर 1929 में जन्म हुआ अमर बोस का. अमर का जन्म तो हो गया, लेकिन तब पिता नोनी गोपाल के पास अस्पताल से पत्नी और बच्चे को डिस्चार्ज कराने के पैसे नहीं थे. सारे पैसे शेयर मार्केट में डूब गए थे. ऐसे में उन्हें दोस्तों से उधार लेने पड़े थे.

बहरहाल, यह बच्चा ही आगे चलकर इंजीनियर बना और फिर साउंड सिस्टम इंडस्ट्री का बादशाह. कंपनी का नाम तो आपने सुना ही होगा- बोस(BOSE). बड़े-बडे़ इवेंट्स और प्रीमियम प्रोग्राम्स में आपने इस कंपनी के साउंड सिस्टम्स लगे देखे होंगे. तो चलिए देर किस बात की! आज की ब्रांड स्टाेरी में जानते हैं, साउंड सिस्टम की दुनिया में बोस के बॉस बनने की कहानी.

रेडियो रिपेयर किया करते थे अमर बोस

अमर बोस को बचपन से ही इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में दिलचस्पी थी. उन्हें रिपेयरिंग का भी शौक था. कभी एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वे पुराने सामान खरीदकर लाते थे और रिपेयर किया करते थे. अपने घर के बेसमेंट में उन्होंने रेडियो रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया. इससे उनकी पॉकेट मनी का इंतजाम हो जाता था. बोस को साउंड सिस्टम से खूब लगाव हो गया और फिर उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक एमआईटी में दाखिला ले लिया. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में.

… और ऐसे स्थापित की बोस कंपनी

एमआईटी में वाई डब्ल्यू ली नाम के एक प्रोफेसर थे. उन्होंने ही बोस की प्रतिभा पहचानी और उन्हें इलेक्ट्रिकल कंपनी शुरू करने की सलाह दी. बोस के पास कई सारे पेटेंट थे, जिन्हें उन्होंने किसी कंपनी को बेचा नहीं था. ऐसे में उन्होंने अपने प्रोफेसर की सलाह पर खुद की कंपनी शुरू करने का मन बना लिया. प्रोफेसर ने ही उन्हें एकदम साधारण नाम रखने की सलाह दी थी, जो लोगों की जुबां पर चढ़ जाए. इस तरह कंपनी का नाम रखा गया- बोस.

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अमर बोस खुद भी बाजार में मौजूद किसी साउंड सिस्टम से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने इसी सेक्टर में एंट्री मारी. बोस करीब 45 साल तक एमआईटी में प्रोफेसर भी रहे थे. वहीं एक लेक्चर में उन्होंने कहा था कि हमेशा बेहतर चीजों के बारे में सोचें और उस तक पहुंचने का रास्ता खुद बनाएं.

निकल पड़ी गाड़ी और आज NASA भी है मुरीद

बोस कॉर्पोरेशन की स्थापना 1964 में हुई. कंपनी का पहला प्रॉडक्ट (एक स्टीरियो) 1966 में लॉन्च हुआ. यह बाजार में छा गया. इसके बाद बोस ने 1968 में BOSE 901 नाम से स्पीकर सिस्टम लॉन्च किया और इस प्रॉडक्ट ने भी बाजार में धूम मचा दी. इसके बाद कंपनी की गाड़ी चल निकली और फिर बोस ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

आज साउंड सिस्टम्स की दुनिया में बोस एक प्रीमियम क्लास प्रॉडक्ट बन चुका है. यहां तक कि नासा जैसी स्पेस एजेंसी भी साउंड सिस्टम के लिए बोस की मदद लेती है. 2013 में अमर बोस का निधन हो गया. उनकी कंपनी की नेटवर्थ कई अरब डॉलर में होगी. लेकिन वो हमेशा कहा करते थे कि उनके लिए पैसे मायने नहीं रखते. अपनी आधी से ज्यादा संपत्ति उन्होंने एमआईटी को दान कर दी थी.

 

 

 

 

 

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