अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: दुनिया जब पश्चिम एशिया के संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते वैश्विक समीकरणों से जूझ रही है, उसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूरोप दौरा अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गया है। फ्रांस, स्लोवाकिया और G-7 शिखर सम्मेलन तक फैले इस छह दिवसीय मिशन को भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। ओमान तट के पास अमेरिका द्वारा भारतीय जहाजों पर हमले में 3 नाविकों की मौत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित मुलाकात की है औरव दुनिया की नजर भारत के अगले एक्शन पर है। कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि मोदी का यह दौरा केवल बैठकों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की ताकत, रणनीति और नेतृत्व का बड़ा प्रदर्शन साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi 13 से 18 जून तक फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण यूरोप दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, यूरोप के साथ रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ के नेतृत्व से भी जोड़कर देखा जा रहा है।इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री Robert Fico और राष्ट्रपति Peter Pellegrini से होगी। वहीं, जी-7 सम्मेलन के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मुलाकात हो सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो भारतीय जहाजों पर हमले, व्यापार, रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। दुनिया की निगाहें इस बात पर भी टिकी हैं कि दोनों नेता बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत-अमेरिका संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के शहर Nice पहुंचेंगे, जहां 14 जून को राष्ट्रपति मैक्रों के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होगी। हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़कर व्यापक वैश्विक सहयोग में बदल चुके हैं। दोनों नेता ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का भी उद्घाटन करेंगे, जिसमें दुनिया भर के निवेशक और वेंचर कैपिटल फंड हिस्सा लेंगे। इससे भारतीय स्टार्टअप और नवाचार क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर जाएंगे। वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद यह पहला अवसर होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्लोवाकिया का दौरा करेगा। राजधानी Bratislava में प्रधानमंत्री मोदी की प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ बैठक होगी।
दोनों देश व्यापार, निवेश, रेलवे विनिर्माण, ऑटोमोबाइल उद्योग, रक्षा सहयोग और उभरती तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। भारत इसे मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहा है। यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। हालांकि भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता रहा है। सम्मेलन में भारत जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, सुरक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकासशील देशों के मुद्दों पर अपना पक्ष रखेगा।भारत स्वयं को ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और मोदी का संबोधन इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 18 जून को प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सम्मेलन VivaTech 2026 में हिस्सा लेंगे।