झारखंड में टूट जाएगा 24 साल का रिकॉर्ड, प्रचंड बहुमत से हेमंत सोरेन की हो रही वापसी

झारखंड में टूट जाएगा 24 साल का रिकॉर्ड, प्रचंड बहुमत से हेमंत सोरेन की हो रही वापसी

झारखंड में पिछले 24 सालों का रिकॉर्ड टूटने वाला है. यदि Axis My India के झारखंड विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के आंकड़े को देखें तो यही बताता है. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुमान के अनुसार इंडिया गठबंधन को 53 सीटें मिल रही हैं, जबकि एनडीए को 25 और अन्य को तीन सीटें मिल रही हैं. बता दें कि झारखंड में फिलहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में हेमंत सोरेन की सरकार है और यदि एग्जिस माई इंडिया के आंकड़े को माने तो फिर से हेमंत सोरेन की सरकार बन रही है. हालांकि ये सभी अनुमान ही हैं. चुनाव परिणाम का ऐलान 23 नवंबर को होगा. तभी यह साफ हो पाएगा कि झारखंड में किसकी सरकार बन रही है, क्या हेमंत सोरेन की सरकार की वापसी होगी या फिर बीजेपी सत्ता हासिल करने में कामयाब रहेगी.

बता दें कि साल 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 30 सीटों पर जीत हासिल की थी. एनडीए ने 25 और कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत हासिल की थी.

 

Exit Poll

Axis My India एग्जिट पोल का अनुमान है कि एनडीए को 39 फीसदी पुरुष और 35 फीसदी महिलाओं को समर्थन मिला है, जबकि इंडिया गठबंधन को 43 फीसदी पुरुष और 47 फीसदी महिलाओं को समर्थन मिलने के आसार है. जेएलकेएम को 8 फीसदी पुरुष और 8 फीसदी महिलाओं का समर्थन मिला है, वहीं अन्य को 10 फीसदी पुरुष और 10 फीसदी महिलाओं को समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है.

चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन में मुकाबला

झारखंड विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में शाम 5 बजे तक 68 प्रतिशत मतदान हुआ. अधिकारियों ने बताया कि झारखंड के 38 विधानसभा क्षेत्रों में बुधवार को शाम 5 बजे तक 68 प्रतिशत मतदान हुआ.

बता दें कि झारखंड विधानसभा की कुल सीटों की संख्या 81 है. इस चुनाव के दौरान एनडीए और इंडिया गठबंधन को जबरदस्त मुकाबला माना जा रहा है. चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के नेता लगातार झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठिये का मुद्दा उठाते रहे. इस दौरान आदिवासियों के अधिकार की बातें भी हुई थी. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के शासन में आदिवासियों के अधिकारों का हनन हुआ था.

वहीं, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा लगातार बीजेपी पर हमला करती रही और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से लेकर संविधान बचाने की बात भी चुनाव प्रचार के दौरान उठाए गये.

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